अनुज हत्याकांड : दृश्यम फिल्म देखकर रचा था पुरूषोत्तम शर्मा के पुत्र की हत्या का षडयंत्र

— छ: दिन तक पानी में पड़े रहने से गल चुकी थी लाश   
— वृन्दावन के नागरिक समाज में खबर सुनकर शोक की लहर
— हजारों की संख्या में मौजूद थे श्मसान घाट पर नगर के लोग

वृन्दावन, 20 दिसम्बर 2018, (VT) वृंदावन में 10 दिसंबर से लापता युवक की हत्या उसके दोस्तों ने ही की थी। इसके बाद शव बोरे में बंद कर पानी से भरे गड्ढे में फेंक दिया। मोबाइल लोकेशन से आरोपियों तक पहुंची पुलिस को पहले दोनों युवकों ने झूठी कहानी बताई। कड़ाई से की पूछताछ के बाद हत्या का राज खुल गया। हत्या पांच लाख के लालच में की गई थी। दोनों आरोपी मृतक के पिता से रुपये वसूलना चाहते थे। पुलिस ने रविवार को शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। मृतक युवक के पिता व्यापारी व समाजसेवी हैं।
जंगल कट्टी निवासी पुरुषोत्तम के 23 वर्षीय पुत्र अनुज को 10 दिसंबर की शाम उसके दो दोस्त घर से बुलाकर ले गए थे। इसके बाद वो नहीं लौटा। पिता पुरुषोत्तम ने दो दिन बाद पुलिस को सूचित कर अनुज की गुमशुदगी दर्ज कराई।

शुरू से ही था दोस्तों पर शक
पिता को शुरू से ही उसके दो दोस्तों पर शक था। जांच कर रही पुलिस ने शक के आधार पर गौरा नगर कालोनी निवासी अनुज के दोस्तों लखन और लोकेश को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद रविवार दोपहर दोनों युवक कहानी बनाते हुए अलग-अलग पुलिस को पहले पानीगांव पुल पर ले गए। जहां उन लोगों ने बताया कि उन्होंने यहां 10 दिसंबर की शाम अनुज के साथ शराब के ठेके पर शराब पी थी। इसके बाद बाइक लेकर पुल पर आए, यहां अनुज ने बाइक रुकवाई और पुल की रेलिंग पर खड़ा हुआ ही था कि यमुना में गिर गया। दोनों के बयान एक होने पर पुलिस ने यमुना किनारे खादरों में शव की खोजबीन की, लेकिन तीन घंटे की तलाश के बाद भी शव नहीं मिला। इस पर पुलिस को दोनों युवकों पर शक हुआ और उनसे कड़ाई से पूछताछ की गई।

10 दिसंबर को ही कर दी थी हत्या
जिसके बाद अनुज की हत्या का राज खुल गया। युवकों ने बताया कि उन्होंने 10 दिसंबर की शाम ही अनुज को मार डाला था। युवकों के बताए अनुसार पुलिस ने लखन के खेत के पास पानी से भरे गड्ढे से बोरे में बंद बंधा हुआ अनुज का शव बरामद कर लिया। छह दिन से पानी में पड़ा शव गल चुका था। लखन के अनुसार लोकेश ने अनुज के सिर में दो गोलियां मारी थीं। इसके बाद कपड़े उतारकर शव को बोरे में ईंटों के साथ बांधकर भरा और पानी से भरे गड्ढे में डाल दिया था। पुलिस ने गुमशुदगी को हत्या की धाराओं में तरमीम कर लिया है।

एक महीने पहले खरीदा था तमंचा
सीओ सदर रमेश कुमार ने बताया कि हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है। यह तमंचा हत्या से एक माह पूर्व खरीदा गया था। अनुज की हत्या के मामले में जांच कर रही पुलिस को लाखन, लोकेश के अलावा इस मामले में तीसरे व्यक्ति के शामिल होने का भी शक है।
आठ सेकेंड की कॉल ने खोल दिया हत्या करा राज
अनुज के पिता पुरुषोत्तम ने पुलिस के सामने बेटे के दो दोस्तों पर शक जाहिर किया था। 10 दिसंबर की शाम दोनों आरोपियों द्वारा अनुज को घर से बुलाने के लिए की गई आठ सेकेंड की कॉल करना ही उनके पकड़े जाने का कारण बना। इस काल के बाद ही उन्होंने मोबाइल बंद कर दिया था। जिस सिम से फोन किया गया, वह वृंदावन के समीपवर्ती गांव नारायणपुर के युवक के गुम मोबाइल की थी। इससे पूर्व उनके मोबाइल की लोकेशन लगातार पानीघाट और गौरा नगर कालोनी में मिली। पुलिस इसी के सहारे आरोपियों तक पहुंची। आरोपियों ने कबूला है कि 10 दिसंबर को हत्या से पहले उन्होंने अनुज के साथ पानी घाट स्थित लखन के खेत पर बनी झोपड़ी में शराब पी थी। वहीं, पुलिस को गुमराह करने के लिए हत्या के बाद अनुज के मोबाइल को दोनों ने वृंदावन छटीकरा के बाद चलने वाले टेंपो में डाल दिया।

फिल्म दृश्यम देखकर रचा था हत्या का षडयंत्र
वृंदावन के अनुज हत्याकांड में एक और बात सामने आई है। आरोपी लखन और लोकेश ने फिल्म दृश्यम को देखकर अनुज की हत्या कर उसे ठिकाने लगाने का तानाबाना बुना। दोनों आरोपी अपनी बनाई योजना में सफल भी हो गए।
पुलिस अनुज की तलाश में इधर-उधर हाथ पैर मारती रही और दोनों आरोपी आराम से घर पर रहे। दोस्त की हत्या के बाद दोनों के माथे पर शिकन तक नहीं थी। किसी को इन दोनों की हरकतों पर शक भी नहीं हुआ। अनुज की हत्या में लोकेश मास्टरमाइंड रहा। घटना का मास्टरमाइंड 11 वीं पास लोकेश ने अपने दोस्त अनुज की हत्या की पटकथा लगभग डेढ़ माह पहले लिखी। उसने बताया कि जैसे फिल्म दृश्यम में देखा, वैसा ही करते गए। पुलिस ने पीटा, फिर भी हमने शव की जानकारी नहीं दी। बाद में लखन के टूटने से भेद खुल गया। पुलिस ने दोनों का चालान कर दिया है।

पहले शराब पिलाई, फिर गोली मार दी
9वीं पास लखन पिछले कई साल से पढ़ाई छोड़कर पोशाक के काम में हाथ अजमा रहा था। उसे काम बढ़ाने के लिए रुपयों की जरूरत थी। लोकेश के अनुसार अनुज पैसे वाले घर का था और नगर निगम के चुनावों में उनकी दोस्ती हुई। इसके बाद वह अक्सर मिलते रहे।
इन दोनों ने पांच लाख की फिरौती के लिए अनुज को अगवा करने की योजना बनाई। उसे 10 दिसंबर की शाम घर से बुलाया। लोकेश की बाइक पर तीनों पानीघाट पहुंचे और शाम सभी ने शराब पी। देर शाम लगभग 9 बजे लघुशंका करते समय लोकेश ने अनुज को दो गोलियां मार दीं। लोकेश ने बताया कि लखन ने शव के कपड़े उतारे और बोरे में भरकर इस लिए पानी से भरे गड्ढे में डाल दिया कि मछली खा जाएंगी। अनुज के हाथ के ब्रेसलेट को पेड़ में छिपाया और मोबाइल को बंद कर दोनों लोकेश के घर पर सो गए।

मोबाइल को टेंपो में डाला
दूसरे दिन व्हाट्सएप पर अनुज के लापता होने की सूचना आने पर मोबाइल को लोकेश सौ फुटा रोड पर टेंपो में डाल आया। लोकेश और लखन ने पुलिस को गुमराह करने की पूरी साजिश रच रखी थी। लोकेश ने बताया कि जैसे फिल्म दृश्यम में देखा हम उसी राह पर चल रहे थे। पुलिस ने पीटा, फिर भी हमने शव की जानकारी नहीं दी। बाद में लखन के टूटने से भेद खुल गया। पुलिस ने दोनों को चालान कर जेल भेज दिया है।
अनुज की हत्या करने के लिए लोकेश ने गौरा नगर कालोनी निवासी योगेंद्र नामक एक युवक से तमंचा और चार कारतूस साढ़े चार हजार रुपए में खरीदे। इसके बाद घटना को अंजाम दिया। पुलिस अब तमंचा बेचने वाले युवक की तलाश कर रही है।DKS

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *