धर्मनगरी वृन्दावन की पीर अमेरिकी कृष्ण भक्त ने लगाई योगी को सुनाई

-लखनऊ जाकर वृंदावन की अव्यवस्थाओं पर सुझाए उपाय

वृन्दावन, 05 जुलाई, 2017, (V.T.) धर्मनगरी वृन्दावन की पीर को लेकर सात समंदर पार से आई एक कृष्णभक्त योगी के दरबार में पहुंची और यहां की समस्या को सत्ता के समक्ष रखा और इसके हल का भी रास्ता बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आशा जताई कि योगी जी आप राजनेता के साथ-साथ संन्यासी भी हैं, आप के अलावा योगीराज की नगरी की कायापलट और कोई नहीं कर सकता।
अमेरिका की कारोलिना एनाबोलन एक बार वृन्दावन दर्शन करने आयी थीं और फिर यहीं की होकर रह गयीं। कृष्ण की भक्ति में वे इतनी मगन हो गई कि उन्होंने वृन्दावन को ही अपना संसार बना लिया। यहां कारोलिना ने अपना नाम रासेश्वरी देवी दासी रख लिया है। अब भगवान की भक्ति और नाम ही उनके जीवन का ध्येय है।
रासेश्वरी जब वृन्दावन में गंदगी, ट्रैफिक, बंदर आदि समस्याओं को देखा, तो उनकी भावनाएं काफी आहत हुईं। उन्होंने देखा कि बंदरों के आतंक के आगे सब कैसे बेबस हैं ? शहर बेहतर व्यवस्था न होने के कारण कैसे जाम का दंश झेल रहा है ? पाॅॅलीथिन के कारण प्रदूषण कैसे चरम स्तर तक पहुंचा जा रहा हैं ? और तो और जिस यमुना की महिमा इतने धर्मग्रंथों ने गायी है, वह मां यमुना आज कलुष से जूझ रही है। यमुना में सीधे नाले गिर रहे हैं। इस सब अव्यवस्थाओंएवं उनके निदान को लेकर पत्र तैयार किया, जिसमें ब्रज के संत, सेवायतों और विप्रों के हस्ताक्षर कराकर लखनऊ पहुंची।
30 जून को वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शास्त्री भवन एनेक्सी में मिली और इन समस्याओं को उनके समक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने वृन्दाव न की समस्याओं को समझा और जल्द ही योजना बनाने का भरोसा दिया। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा व महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को भी उन्होंने कई उपाय सुझाए हैं।

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बस इतना कर दे सरकार

-यमुना प्रदूषण दूर करने के लिए हथिनी कुंड से जल छोड़ने के साथ शहरों के नालों को टेप किया जाए।

-बंदर सफारी बनाकर मेल और फीमेल बंदरों को अलग रखा जाए। श्रद्धालु उनके खाने-पीने की वस्तुएं डालें, ताकि बंदरों की आबादी भी न बढ़े और शहर के अंदर का आतंक भी खत्म हो सके।

-पशु पालने वालों को शहर के बाहर थोड़ी-थोड़ी भूमि सरकार की ओर से प्रदान कर उन्हें उसी स्थान पर रखा जाए। ये भूमि उन्हें तब तक ही मुहैया कराई जाए, जब तक वे पशुओं का पालन कर रहे हैं।

-ट्रैफिक व्यस्था पर सुझाव दिया कि शहर के एंट्री प्वाइंट पर पार्किंग बनाई जाए, यहीं से ई-रिक्शा का संचालन हो। ई-रिक्शा का पंजीकरण, चालक को आइडी कार्ड जारी हों और शहर में कहीं भी रुकने की इजाजत न हो।

-साबूदाना से बनी पॉलीथिन का उपयोग बढ़े। वह साबूदाना से बनी पॉलीथिन भी साथ ले गई थीं। ये पॉलीथिन इतनी मजबूत है कि आसानी से नहीं फटती और गर्म करने के पांच मिनट में ही साबूदाना में परिवर्तित हो जाएगी।

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