वृन्दावन हरित सम्माह समारोह में हरित क्रांति स्थापित करने के लिए सम्मानित हुए हरित प्रेमी

– गौ संरक्षण, सघन वृक्षारोपण के सफल प्रयास, हरित लेखक, हरित मंदिर एवं हरित विद्यालय
– झालर और घंटो की ध्वनि पर खूब नाचे भगवान वराह देव  
वृन्दावन, 14 सितम्बर 2018, (VT) वाराह जयंती के अवसर पर जयसिंह घेरा स्थित गम्भीरा में आयोजित वृंदावन हरित सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में हरित क्रांति स्थापित करने के लिए संस्थाओं एवं व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
वृंदावन हरित सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी, राधाकृष्ण पाठक, बिहारी लाल वशिष्ठ एवं जगन्नाथ पोद्दार आदि ने संयुक्त रूप से भगवान वराह देव के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित, माल्र्यापण एवं आरती उतारकर समारोह प्रारम्भ हुआ, अध्यक्षता करते हुए श्रीगोस्वामी ने कहा वाराह जयंती के मौके पर पृथ्वी दिवस मनाना अच्छी परंपरा है। इस मौके पर ब्रज वृंदावन में हरितिमा के लिए कार्य कर रही संस्थाओं एवं व्यक्तियों को ग्रीन अवार्ड से सम्मानित किया जाता है।
समारोह में हरित मंदिर श्रीराधावल्लभ मंदिर, हरित लेखक आचार्य नरेश नारायण, सघन वृक्षारोपण के लिए रामकृष्ण त्रिपाठी, हरित विद्यालय सुवटीदेवी झुनझुनवाला एवं भक्तिवेदान्त गुरूकुल एवं इन्टरनेशनल विद्यालय, गौसेवा संरक्षण के लिए सूरश्याम गौशाला, पारसौली एवं वृन्दावन गौरक्षा एवं सेवा समिति, आयुर्वेद एवं हर्बल के प्रचार-प्रसार हेतु वैद्य प्रेमशंकर खण्डेलवाल को सम्मानित किया गया।
समारोह में मौजूद अतिथियों में एनजीटी में वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल चैधरी ने कहा कि वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि है। बदलते जमाने में इसका स्वरूप बिगड़ गया है। इसमें बदलाव की जरूरत है। पार्षद दल के उपनेता राधाकृष्ण पाठक ने कहा कि वृंदावन के हर नागरिक को हर साल एक वृक्ष लगाना चाहिए। नगर आयुक्त समीर वर्मा ने कहा कि उनकी कल्पना है कि निगम सीमा में शामिल तीर्थनगरी अपने प्राचीन और भव्य स्वरूप को पा ले।
समारोह में वराह जयंती के अवसर पर भगवान वराह का स्वरूप भी सजाया गया, जिन्होंने झालर और घंटो की ध्वनि पर नृत्य किया, जिसे देख श्रद्धालु एवं भक्त मंत्रमुग्ध हो गए और भगवान वराहदेव के जयकारे लगाने लगे। तत्पश्चात् माल्यार्पण कर भगवान वराह स्वरूप की आरती की गई।
इस अवसर पर निदेशक जगन्नाथ पोद्दार, गोस्वामी दीपक आचार्य, संजीवकृष्ण ब्रजवासी, बिहारीलाल वशिष्ठ, मोहनलाल मोही, हरिवंश खण्डेलवाल आदि लोग उपस्थित थे।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *